प्रेमचंद का वैचारिक लेखन हिन्दू और मुस्लिम एका की जैसी बात करता है, उसकी आवश्यकता आज के भारतीय समाज को बहुत ज़्यादा है : वीरेंद्र यादव
‘स्मरण प्रेमचंद 22’ के अंतर्गत कथा सम्राट की 86 वीं पुण्यतिथि के अवसर पर ‘नहीं बदला प्रेमचंद का देस’ समारोह
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