व्यक्ति को अपने जीवन में मन, वाणी, कर्म से किसी को भी कष्ट नहीं देना चाहिए। जो व्यक्ति किसी को भी कष्ट नहीं देता वह बैकुंठ में जाता है-भागवताचार्य नीरज नयन
महाराजा अग्रसेन भवन में श्रीमद्भागवत सप्ताह में बह रही भक्ति की धारा, राधे-राधे की गूंज के साथ श्रद्धालु श्रवण कर
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