अपनी रोशनी बिखेरकर अस्त हो गया सूर्यनगर का सूर्य!

आगरा। आज मन बहुत उदास है, क्योंकि आज एक ऐसे शख्श दुनिया को अलविदा कह गये जो कि तमाम शख्शियतों को अभिनंदन ग्रंथों और स्मृति ग्रंथों में कलमबद्ध किया करते थे। मैं ज़िक्र कर रहा हूँ सूर्यनगर में रहने वाले ऐसे सूर्य डॉ.प्रणवीर सिंह चौहान साहब का जो कि सोमवार 28 जुलाई को तड़के ही सूर्योदय होने से पूर्व ही अपनी रोशनी बिखेरकर सदा के लिए अस्त हो गया। उनके घर के आंगन और बगीचे में चाय के साथ क्या खूब चर्चाओं के दौर चला करते थे। अब उस बगिया में वो बैठकें नहीं होंगी, क्योंकि बगिया का माली हमेशा के लिए अब उस बगिया को खाली करके जो चला गया है। पत्रकारिता में दैनिक ‘सैनिक’ समाचारपत्र एवं ‘युवक’ मासिक पत्रिका के जरिये अपनी कलम से कमाल दिखा चुके डॉ.चौहान साहब के साथ जब भी हम बैठते थे अखबारी दुनिया में मौजूदा हालात पर चिंता व्यक्त किया करते थे। स्वयं के जमाने की यादों को ताज़ा करके सच्ची पत्रकारिता को जिन्दा रखने की प्रेरणा देते थे। हिंदी साहित्य में सदा वे सद साहित्य की रचना के लिए प्रेरित किया करते थे। तमाम यादें हैं उनके साथ, लिहाज़ा हमारे लिए उनको भुला पाना भी अब बेहद मुश्किल ही होगा, ऐसी महान शख्शियत को शत-शत नमन और विनम्र श्रद्धांजलि!

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