“हज़ारों साल से प्रतीक्षारत थी ये धरती, धाम हो जाने से पहले, समंदर भी कहां देता है रस्ता, किसी को राम हो जाने से पहले”-अज़हर इक़बाल
होटल लैमन ट्री में आयोजित ‘फन्नी ढाबा’ कवि सम्मेलन में बही हास्य-व्यंग्य, गीत और ग़ज़ल की त्रिवेणी। ब्रज पत्रिका, आगरा।
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