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भारतीय भाषाओं के भक्ति साहित्य में तलाशेंगे सामाजिक-सांस्कृतिक समरसता

भारतीय भाषाओं के भक्ति साहित्य में सामाजिक एवं सांस्कृतिक समरसता विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी 19,20 एवं 21 फरवरी को होगी।

ब्रज पत्रिका, आगरा। केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के नवीकरण एवं भाषा प्रसार विभाग तथा पूर्वोत्तर शिक्षण सामग्री निर्माण विभाग के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक 19, 20 एवं 21 फरवरी 2026 को “भारतीय भाषाओं के भक्ति साहित्य में सामाजिक एवं सांस्कृतिक समरसता तुलनात्मक अध्ययन” विषय पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। यह संगोष्ठी केंद्रीय हिंदी संस्थान के मुख्यालय में संपन्न होगी।

संगोष्ठी का उद्देश्य भारतीय भाषाओं के भक्ति साहित्य में निहित सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक एकता तथा लोक-मंगल की परंपरा का तुलनात्मक परिप्रेक्ष्य में अध्ययन करना है। देश के विभिन्न विश्ववि‌द्यालयों एवं शोध संस्थानों से आए वि‌द्वान हिंदी सहित अपनी-अपनी भारतीय भाषाओं के संदर्भ में शोध-पत्र प्रस्तुत करेंगे। संगोष्ठी में असमिया, अवधी, बांग्ला, ब्रज, गुजराती, कन्नड़, मराठी, मणिपुरी, मलयालम, पंजाबी, तमिल, तेलुगु, सिंधी, उड़िया, मैथिली एवं राजस्थानी भाषाओं के वैष्णव भक्ति काव्य पर केंद्रित शोध आलेख प्रस्तुत किए जाएँगे।

इस अवसर पर देश के प्रतिष्ठित वि‌द्वानों की उपस्थिति रहेगी, जिनमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह-सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल, केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल के उपाध्यक्ष आचार्य सुरेंद्र दुबे, संस्थान के निदेशक आचार्य सुनील बाबुराव कुळकर्णी, हरिदेव जोशी, पत्रकारिता विश्वविद्यालय, जयपुर के कुलपति आचार्य नन्द किशोर पाण्डेय, कलकत्ता विश्ववि‌द्यालय के पूर्व आचार्य रामेश्वर मिश्र, भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला के निदेशक आचार्य हिमांशु चतुर्वेदी, हैदराबाद विश्ववि‌द्यालय की पूर्व आचार्य माणिक्यंबा तथा कलकत्ता विश्वविद्यालय की पूर्व आचार्या रेशमी पंडा मुखर्जी प्रमुख हैं। संगोष्ठी के दौरान स्वदेशी एवं विदेशी विद्यार्थियों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएँगी।

इस संगोष्ठी की संयोजक आचार्य सपना गुप्ता तथा संगोष्ठी की सह-संयोजक डॉ. मीनाक्षी दुबे ने बताया कि,

“इस महत्वपूर्ण संगोष्ठी के माध्यम से भारतीय भाषाओं के भक्ति साहित्य की साझा सांस्कृतिक विरासत को रेखांकित किया जाएगा तथा राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता के मूल्यों को सुदृढ़ करने की दिशा में सार्थक विमर्श होगा।”

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