हाजी रमज़ान कहते हैं जिनको सभी, ऐसे पीरे तरीकत को नींद आ गयी

ब्रज पत्रिका, आगरा। हज़रत ख्वाजा शैख़ सैय्यद फ़तिहउद्दीन बलखी अलमारूफ़ ताराशाह चिश्ती साबरी के सज्जादानशी पीरे तरीकत आले पंजतनी पीर अलहाज रमजान अली शाह चिश्ती साबरी रहमतुल्लाह अलैह कंपाउंड, आगरा क्लब की बारगाह में मशहूर शायरों ने शेर पेश करके अपनी खिराज-ए-अकीदत पेश की।

सज्जादानशी पीर हाजी रमज़ान अली शाह साहब की समस्त जिंदगी खिदमत-ए-ख़ल्क़ के लिए ही समर्पित रही थी। उनकी बारगाह में कई शायरों ने अपनी खिराज-ए-अकीदत पेश की।

सभी ने एक ही आवाज़ से कहा कि हज़रत पीर साहब सरीखे रोशन चमकते हुए सितारे का इस तरह दुनिया से जाना हम लोगों के लिए न पूरी होने वाली कमी है, हज़रत की आवाज़ में बुलंदी, हकपरस्ती, अद्लपरस्ती और इंसानियत का सबक अहम रहता था आपने अपनी सारी जिंदगी लोंगों में एकता मौहब्बत और भाईचारा कायम करने के लिए और बुजुर्गों की तालीम को आगे बढ़ाने के लिए बहुत मेहनत से काम किया और परचम-ए-हक़ को लहरा दिया। औलिया-ए-इकराम की मोहब्बत को हर इंसान के दिल मे चस्पा कर दिया। उनकी बारगाह में मशहूर शायरों ने नज़राना-ए-अकीदत पेश किया।अनवर आमान ‘अकबराबादी’ ने कहा कि-

तीरगी सी चारसू है और फ़ज़ा है शोगवार,
ये बताओ कि आपके बिन किस तरह आये करार।
हज़रते रमजान शाह बलखी तो रुख्सत हो गए,
दे गए आंखों को आंसू दिल को गम और इंतज़ार।

महासचिव विवेक कुमार जैन ने कहा कि-

जबसे तेरा गुलाम हो गया तबसे मेरा भी नाम हो गया,
वरना औकात क्या थी मेरी सबसे बढ़िया है सबसे खरी।

दिलकश ‘जालोनवी’ ने अपने शेर में कहा कि-

आफताब-ए -हिदायत को नींद आ गयी,
माहताब-ए-वलायत को नींद आ गयी।
पासदारे शरीयत को नींद आ गयी,
राजदारे हक़ीक़त को नींद आ गयी।
हाजी रमज़ान कहते हैं जिनको सभी,
ऐसे पीरे तरीकत को नींद आ गयी।

राज ‘बीकानेरी’ ने अपने अशआर में इस तरह से खिराजे अकीदत पेश की-

इस चमन से अंदलीबे खुश बयाँ रुख्सत हुए,
थे जो रूह-ए-आगरा वो गुलसितां रुख्सत हुए।
क्यूँ न छा जाएं दिलों पर हज़रते यासो अलम,
अमन-ओ-इंसा वो वफ़ा का पासवां रुख्सत हुए।

तनवीर निज़ामी ‘अकबराबादी’ ने शेर अर्ज़ किया-

याद आई है मुर्शिद की कुछ अश्क़ बहाने दो,
सरकार के कदमों में ये फूल चढ़ाने दो।
सरकार की खिदमत में मिलता है सुकूँ दिल को, अश्कों की जुबानी अब रूदाद सुनाने दो।

शाहिद नदीम ने अपनी खिराज में ये शेर अर्ज़ किया-

खला में खो गये दोनो जहाँ छोड़ गये,
ज़मीं छोड़ गये आसमां छोड़ गये।
जहां-जहां से भी गुजरे सदाकतें लेकर,
वहां-वहां पर वफ़ा के निशां छोड़ गये। बुझ गया है जलते-जलते वो चिरागे जिंदगी, जिसके दम से थी अदब की अंजुमन में रोशनी।

दरगाह हज़रत ख्वाजा शैख़ सैय्यद फतिहउद्दीन बल्खी अलमारूफ़ तारा शाह चिस्ती साबरी।

मौजूदा दौर में कोरोना वायरस के संक्रमण के खतरे के मद्देनजर देश भर में चल रहे लॉक डाउन के चलते व्हाट्सएप के जरिये खिराज-ए-अकीदत पेश करने वालों में पीरजादा बुंदु खान,  पीरजादा हाजी इमरान अली, पीरजादा हाजी कासिम अली, डॉ. कृष्णवीर सिंह कौशल, रईसुद्दीन कुरैशी, प्रमोद गोयल, देवेंद्र कुमार चिल्लू, ग़ुलाम मोहम्मद, पुरुषोत्तम साबरी, तरुण साबरी, करुण साबरी, रफ़ीक़ साबरी, आशीष साबरी, जयसिंह साबरी, पंडित जगदीश प्रसाद, इरफान साबरी,  रमजान खान साबरी, अब्दुल सईद खान, उमेश चंदेल, राकेश चंदेल आदि शामिल थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!