“वह मेरे लिये अपने बेटे की तरह है’’, सुमित राघवन से अपने रिश्‍ते को लेकर अंजन श्रीवास्‍तव ने कही यह बात!

ब्रज पत्रिका। अंजन श्रीवास्‍तव (सीनियर वागले) और सुमित राघवन (जूनियर वागले) आज के दौर के पसंदीदा पिता-बेटे की जोड़ी में से एक हैं। सोनी सब के शो ‘वागले की दुनिया-नई पीढ़ी नये किस्‍से‘ के ये मशहूर एक्‍टर्स ना केवल परदे पर अपनी बेहतरीन केमेस्‍ट्री से लोगों का दिल जीत रहे हैं, बल्कि ऑफ-स्‍क्रीन भी इनकी बॉन्डिंग कमाल की है। एक-दूसरे के साथ शानदार तालमेल से लेकर सेट पर एक-दूसरे का मनोरंजन करने तक, अंजन और सुमित सही मायने में पिता-बेटे की आदर्श तस्‍वीर पेश कर रहे हैं।

जिस तरह यह शो लगातार लोगों का दिल जीत रहा है, ऐसे में इन एक्‍टर्स ने बताया कि कैसे इतने कम समय में परदे पर पिता-बेटे की यह जोड़ी वास्‍तविक रूप में भी गहरी हो गयी। यह जोड़ी परदे पर अपना जादू चला रही है।

सुमित के साथ अपने अनूठे रिश्‍ते पर अंजन श्रीवास्‍तव कहते हैं,

‘’एक एक्‍टर के तौर पर शूटिंग के दौरान को-स्‍टार्स काम करते-करते परिवार जैसे बन जाते हैं और सुमित के साथ कुछ ऐसा ही रिश्‍ता बन गया। वह मेरे लिये मेरे बेटे जैसे ही हैं। ऑफ-स्‍क्रीन भी हमारे बीच पिता-बेटे जैसा रिश्‍ता है। भले ही हम अलग-अलग सेट पर शूटिंग कर रहे हैं लेकिन सुमित मेरा हाल-चाल लेना नहीं भूलते। वक्‍त के साथ हमारा रिश्‍ता मजबूत होता जा रहा है।‘’

अंजन जी के इस जवाब पर सुमित राघवन कहते हैं,

‘’एक इंसान के तौर पर और एक एक्‍टर के तौर पर मुझे अंजन जी की एक बात बहुत पसंद है कि वे हमेशा ही तैयार रहते हैं। उन्‍होंने मुझे अपने दायरे से बाहर निकलने के लिये प्रेरित किया, क्‍योंकि आज भी वह अपने काम के बारे में ज्‍यादा से ज्‍यादा जानने की कोशिश करते हैं। इससे परदे पर एक शानदार केमेस्‍ट्री नज़र आती है।‘’

पिता-बेटे के अपनी कमाल की ऑन-स्‍क्रीन केमेस्‍ट्री के बारे में अंजन जी कहते हैं,

‘’ऑफ-स्‍क्रीन हमारे रिश्‍ते की सहजता की वजह से ऑन-स्‍क्रीन इतनी अच्‍छी केमेस्‍ट्री उभरकर सामने आती है। सुमित इस रिश्‍ते को लगातार बेहतर बनाने की कोशिश करते रहते हैं। वह चीजों में मजेदार पहलू को देखते हैं, जिसकी वजह से हमारा रिश्‍ता और गहरा होता जा रहा है।‘’

सुमित आगे कहते हैं,

‘’वाकई ऑन-स्‍क्रीन हमारी केमेस्‍ट्री कमाल की है। ऐसा लगता ही नहीं है कि हम एक नये शो के लिये शूटिंग कर रहे हैं। हम बड़ी ही खूबसूरती से किरदारों में ढल जाते हैं।”

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