“ओ नदी! इतना बता दो, रेत क्यों होने लगीं? क्यों भरापन देह का तुम, इस तरह खोने लगीं?”
रचनात्मक पवित्रता को बचाए हुए हैं डॉ. त्रिमोहन ‘तरल’-प्रोफेसर रामवीर सिंह आगरा राइटर्स एसोसिएशन ने वरिष्ठ कवि डॉ. त्रिमोहन ‘तरल’
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