तंग आकर गलतबयानी से, हम अलग हो गये कहानी से, आदमी आदमी का दुश्मन है, अब सियासत की मेहरबानी से!
41वां चित्रांशी कुल हिंद मुशायरा* और *17वां फ़िराक इंटरनेशनल अवार्ड समारोह होटल ग्रैंड में हुआ आज शाम।
चित्रांशी फिराक इंटरनेशनल अवार्ड शायर मंसूर उस्मानी को, स्व. के.सी. श्रीवास्तव अवार्ड अरुण डंग को प्रदान किया गया।
ब्रज पत्रिका, आगरा। चित्रांशी संस्था द्वारा पद्म भूषण प्रो.रघुपति सहाय फ़िराक गोरखपुरी की याद में 41वें चित्रांशी कुल हिंद मुशायरे और 17वें फ़िराक इंटरनेशनल अवार्ड समारोह का आयोजन 25 अप्रैल की शाम आगरा कैंट स्थित होटल ग्रैंड किया गया। जिसमें चौथा केसी श्रीवास्तव अवार्ड प्रदान किया गया। मुल्क के नामचीन शायरों ने अपने-अपने बेहतरीन कलाम पेश किए।
मशहूर शायर मंसूर उस्मानी को चित्रांशी फिराक इंटरनेशनल अवार्ड-2026 से नवाजा गया। चौथे केसी श्रीवास्तव अवार्ड से वरिष्ठ साहित्यकार और पर्यटन उद्यमी अरुण डंग को सम्मानित किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि फिरोजाबाद के अपर जिला जज मुमताज़ अली थे, विशिष्ट अतिथि जीएसटी कमिश्नर इंद्रनील और सेंट जॉन्स डिग्री कॉलेज आगरा के उर्दू विभाग के अध्यक्ष सैयद सिब्ते हसन नक़वी थे। चित्रांशी संस्था के अध्यक्ष तरुण पाठक ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। चित्रांशी संस्था के पदाधिकारियों ने अतिथियों का माला पहनाकर स्वागत किया। मंच संचालन महासचिव अमीर अहमद एडवोकेट ने किया।
कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में शमां रोशन होने से लेकर देर रात समापन तक शेर-ओ-शायरी का बेशक शानदार सिलसिला चला। उर्दू अदब की बेहतरीन महफिल में साहित्य प्रेमियों ने भी शायरों की रचनाओं की करतल ध्वनियों से हौसला-अफजाई की। शुरुआत में फ़िराक इंटरनेशनल अवार्ड से देश के मशहूर शायर मंसूर उस्मानी को 2026 के फ़िराक इंटरनेशनल अवार्ड से नवाजा गया। कार्यक्रम में संस्कृति प्रेमी पर्यटन उद्यमी अरुण डंग को चतुर्थ केसी श्रीवास्तव अवार्ड से सम्मानित किया गया।
सम्मान समारोह में मशहूर गायक सुधीर नारायण ने शायर मंसूर उस्मानी का परिचय पढ़ा। वहीं भारतदीप माथुर ने उनके सम्मान पत्र को पढ़ा। साहित्यकार अरुण डंग का परिचय अमीर अहमद ने पढ़ा। वहीं उनके सम्मान पत्र को डॉ. महेश धाकड़ ने पढ़ा।
मंसूर उस्मानी ने अपने सम्मान के प्रति आभार जताते हुए कहा,
“जहां-जहां उर्दू बोली जाती है, वहां-वहां हिंदुस्तान बोलता है।”
अरुण डंग ने गंगा जमुनी तहजीब को जिंदा रखने का आह्वान किया।
अध्यक्षीय संबोधन में तरुण पाठक ने कहा कि,
“हम कामयाबी की राह पर बढ़ रहे हैं उर्दू से मोहब्बत करने वाले लोगों के कारण, उनके प्रति आभार।”
मुख्य अतिथि फिरोजाबाद के अपर जिला जज मुमताज़ अली ने कहा,
“चित्रांशी के माध्यम से जो यह कार्यक्रम किया जा रहा है यह सभ्यता और संस्कृति को जिंदा रखने का प्रयास है। बड़ा कोई नहीं होता अपनी धन दौलत से बड़ा होता जा इंसान अपने कर्म से, जिसके लिए उसको सदा याद किया जाता है।”
विशिष्ट अतिथि जीएसटी कमिश्नर इंद्रनील और सेंट जॉन्स डिग्री कॉलेज आगरा के उर्दू विभाग के अध्यक्ष सैयद सिब्ते हसन नक़वी ने भी अपने-अपने विचार व्यक्त किए।
मुशायरे में मुरादाबाद के मंसूर उस्मानी, मेरठ के फ़ख़री मेरठी, अलीगढ़ के डॉ.मुजीब शहज़र, अमरोहा के निकहत अमरोहवी ने अपने कलाम पेश किए। इनके अलावा आगरा के नौफ़िल आर्या ने भी अपने खूबसूरत कलाम पेश किए। साथ ही आगरा के युवा कवि कुमार ललित ने भी अपनी कई उम्दा रचनाएं प्रस्तुत कीं।
मंसूर उस्मानी ने क्या खूब शेर पढ़े-
“तंग आकर गलतबयानी से
हम अलग हो गये कहानी से
कितनी सदियों का क़त्ल होता है
ऐक लम्हे की बदगुमानी से
आदमी आदमी का दुश्मन है
अब सियासत की मेहरबानी से।”
फ़ख़्री मेरठी ने अपने ये शेर पेश किए-
“हमारे पास बुज़ुर्गो की जाएदाद नहीं
ख़ुदा का शुक्र है, घर में कोई फ़साद नहीं
तमन्ना फायदे की थी, मगर घाटा ख़रीदा है
लहू को बेचकर, मज़दूर ने आटा ख़रीदा है।”
सलीम अमरोहवी ने इस शेर से मौजूदगी का अहसास कराया-
“बड़ा रुतबा है यारो आदमी का,
मगर वो आदमी फिर आदमी हो
फ़क़त अपने ही अपने हों जहां पर
बहुत दुश्वार है जीना वहां पर
सितम पर सितम ये वो ढा रहे हैं
हमारा हाल पूछे जा रहे हैं।”
निकहत अमरोहवी ने ये शेर सुनाया-
“जहाँ में जिसका भी ऊंचा मकान होता है
वो शख़्स अपने क़बीले की शान होता है
दिखाई देती है बेटी उसी के आंगन में
कि जिस बशर पे ख़ुदा मेहरबान होता है।”
डॉ. मुजीब शहज़र ने अपने इस शेर से तालियां बटोरीं-
“प्यासे पंछी सोच रहे हैं बैठे रेत के टीले पर
आज यज़ीदी दौर नहीं फिर क्यूँ हैं पहरे टीलों पर
तेरी मेरी जंग का अब तो फैसला वक़्त के हाथ में है
मेरा लश्कर छोटी चिड़ियां तेरा लश्कर फीलों पर।”
नौफ़िल आर्या ने शेर पढ़ा-
“लाख चाहेंगे ज़माने वाले
हम नहीं तुझ को भुलाने वाले
तेरी कश्ती भी तो जल जाएगी
आग दरिया में लगाने वाले।”
कुमार ललित ने अपनी इस रचना से तारीफ पाई-
“तुम्हारी साँस पल भर को हमें यदि मिल गई होती
हमारी देह चंदन सी सुवासित हो गई होती
अगर तुम बाँच लेते चाहतों की पांडुलिपियाँ तो
हमारे नेह की पुस्तक प्रकाशित हो गई होती।”
शुरू में अतिथियों का स्वागत एसीपी इमरान, संस्था के कोषाध्यक्ष अब्दुल कुद्दूस खां, जीडी शर्मा, हरीश सक्सैना चिमटी, इमरान शम्सी, कर्नल जीएम खान, महमूद उज्जमा, अभिनय प्रसाद, रूपेश कुलश्रेष्ठ, सलीम एटवी, वैभव असद, नाहर सिंह, शैलेश वार्ष्णेय, कपिल अग्रवाल, राजेश सहगल, राजीव गुप्ता, प्रो. मौहम्मद हुसैन, बल्देव भटनागर, डॉ. सिराज कुरैशी आदि ने किया। कार्यक्रम में संस्था के पूर्व अध्यक्ष प्रो.ब्रजेश चंद्रा, बैकुंठी देवी कॉलेज की उर्दू विभागाध्यक्ष डॉ.नसरीन बेगम, होटल ग्रैंड के अनिल डंग, दिल ताजमहली, रमेश पंडित, पूनम भार्गव ज़ाकिर, डॉ. शादा जाफरी, अनिल शर्मा एडवोकेट, हेमेंद्र चतुर्वेदी एडवोकेट, समी आगाई, इकराम अख्तर, अखलाक हुसैन, नूतन अग्रवाल, परवेज़ आलम, विशाल रियाज़ आदि मौजूद थे।

