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पद्मश्री बाबा योगेंद्र दा के रूप में प्रस्थान कर गया भारतीय संस्कृतिक चेतना का अनूठा संत, भारतीय कला जगत के एक युग का हुआ अंत!

कला ऋषि-पद्मश्री बाबा योगेंद्र दा को संस्कार भारती ने सूरसदन में दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि।

ब्रज पत्रिका, आगरा। बाबा का जाना देश, संस्कृति और संपूर्ण कला जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। बाबा एक महात्मा, जुझारू व्यक्तित्व के धनी और संपूर्ण कला साधक थे। वे सच्चे राष्ट्रवादी और दूरदर्शी प्रचारक थे। उन्होंने अपने विलक्षण गुणों से देश के कला जगत के परिदृश्य को ही बदल कर रख दिया। हर कलाकार अपनी विचारधारा से ऊपर उठकर उनका मान सम्मान करता था। वे हर सांस्कृतिक संगठन के वंदनीय थे। इसीलिए वे कला जगत के अजात शत्रु थे।

ये विचार विभिन्न वक्ताओं द्वारा संस्कार भारती के बैनर तले संस्कार भारती के संस्थापक- संरक्षक कला ऋषि-पद्मश्री बाबा योगेंद्र दा को श्रद्धांजलि देने के लिए शुक्रवार शाम सूरसदन में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में व्यक्त किये गये। एक ओर सभागार में लोग बाबा योगेंद्र दा को अपनी भावांजलि दे रहे थे, वहीं सभागार के बाहर लगाए गए बाबा के चित्र पर सब उन्हें पुष्पांजली भी अर्पित कर रहे थे।

ये झलके विचार

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री शिव प्रकाश ने कहा कि,

“योगेंद्र दा आदर्श प्रचारक की मूर्ति थे। वह अथक परिश्रमी, निर अहंकारी और बीतरागी थे।”

मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक प्रमुख सुरेश चंद रहे। संस्कार भारती के राष्ट्रीय महामंत्री अश्वनी महेश दलवी ने कहा कि उन्होंने हमको कर्म योग का प्रत्यक्ष बोध कराया। महापौर नवीन जैन ने उन्हें प्रेरणा का स्रोत बताया। उत्तर प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष दिनेश चंद ने कहा कि कलाकार उन्हें अपना आराध्य मानते थे और उनसे बेहद प्रेम करते थे।

बांकेलाल गौड़ ने रुंधे गले से कहा कि,

“वे शून्य से विराट और बीज से वटवृक्ष का दर्शन कराने के साथ ध्येय के प्रति स्वयं को आहूत करने वाले महापुरुष थे।”

डॉक्टर श्रीभगवान शर्मा ने कहा कि लोक कला उनके अंतः करण की आवाज थी। प्रोफेसर सुगम आनंद ने कला ऋषि योगेंद्र दा के नाम पर जयपुर हाउस में एक पार्क का नामकरण करने और वहां उनकी प्रतिमा लगाने के साथ-साथ डॉक्टर भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय द्वारा उनके नाम पर स्वर्ण पदक दिए जाने का सुझाव दिया। कार्यक्रम संयोजक डॉ. पंकज नगायच ने उनको सभी कला साधकों का चंद्रचूड़ बताया। डॉक्टर मुनीश्वर गुप्ता ने कहा कि बाबा ने अपने आचरण से सबको सिखाया। डॉक्टर ए.के. सिंह ने कहा कि बाबा अंतिम समय तक समाज के लिए सक्रिय रहे। उन्होंने भारत को गौरवान्वित किया। कार्यक्रम संचालक राज बहादुर सिंह राज ने बताया कि अमृत महोत्सव की स्मारिका का प्रथम खंड बाबा योगेंद्र दा को समर्पित किया जाएगा। भाजपा ब्रज प्रांत अध्यक्ष रजनीकांत माहेश्वरी, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के पूर्व कार्यकारी उपाध्यक्ष सोम ठाकुर और श्याम किशोर गुप्त ने भी विचार प्रस्तुत किए।

ये भी रहे शामिल

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के पूर्व राज्य मंत्री चौधरी उदयभान सिंह, दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री राकेश गर्ग, उत्तर प्रदेश महिला आयोग की सदस्य निर्मला दीक्षित, मुकेश मिश्रा, अशोक कुलश्रेष्ठ, एस.के. मिश्रा, विश्वेंद्र सिंह, हरि मोहन सिंह कोठिया आदि शामिल रहे।

इन्होंने संभालीं व्यवस्थाएं

संस्कार भारती के प्रांतीय कोषाध्यक्ष आशीष अग्रवाल ने संस्कार भारती सहित विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों से प्राप्त हुए श्रद्धांजलि संदेशों का उल्लेख किया। संस्कार भारती के पूर्व अखिल भारतीय साहित्य प्रमुख राज बहादुर सिंह ‘राज’ ने श्रद्धांजलि सभा का संचालन किया। संस्कार भारती के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष सुभाष अग्रवाल, प्रचारक नंद किशोर, ओम स्वरूप गर्ग, यतेंद्र सोलंकी, प्रखर अवस्थी और डॉ. मनोज पचौरी ने विभिन्न व्यवस्थाएं संभालीं। डॉ. पंकज नगायच संयोजक और कवि कुमार ललित मीडिया समन्वयक रहे।

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