“तूने मेरी राह में कांटे बिछाये थे कभी, आ मेरे मोहसिन मैं पहले तेरी गुलपोशी करूं, ऐसी हमदर्दी दिखाई उसने इक दिन जोश में, मेरा दामन चाक कर डाला रफ़ू के नाम पर!”
उर्दू-हिंदी के विद्वान शायर डॉ. कलीम क़ैसर (गोरखपुर) को 51000 की पुरस्कार राशि का चित्रांशी फ़िराक़ इंटरनेशनल अवार्ड-2025 से सम्मानित
Read More