रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कोविड-19 की दूसरी लहर के खिलाफ लड़ाई में रक्षा मंत्रालय और सशस्त्र बलों के प्रयासों की समीक्षा की

अतिरिक्त संख्या में स्वास्थ्यकर्मियों को जुटाना, ऑक्सीजन की आपूर्ति को सुगम बनाने के लिए लॉजिस्टिक सहायता देना और नए ऑक्सीजन संयंत्र स्थापित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

ब्रज पत्रिका। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 01 मई, 2021 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए देश में वर्तमान कोविड -19 की स्थिति के खिलाफ लड़ाई में नागरिक प्रशासन की मदद करने के लिए रक्षा मंत्रालय और सशस्त्र बलों के प्रयासों की समीक्षा की।

इस बैठक में रक्षा प्रमुख जनरल बिपिन रावत, रक्षा सचिव डॉ. अजय कुमार, नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आर. के. एस. भदौरिया, थलसेना प्रमुख जनरल एम. एम. नरवाने, रक्षा (अनुसंधान एवं विकास) विभाग के सचिव और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के अध्यक्ष डॉ. जी.सतीश रेड्डी, सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा (एएफएमएस) के महानिदेशक सर्जन वाइस एडमिरल रजत दत्ता, एकीकृत रक्षा स्टाफ (मेडिकल) की उप – प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल माधुरी कानिटकर और अतिरिक्त सचिव (रक्षा उत्पादन) संजय जाजू और रक्षा मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को जानकारी दी गई कि पिछले कुछ वर्षों में सेवानिवृत्त हुए लोगों को ड्यूटी पर बुलाने, जैसे विशेष उपायों के जरिए लगभग 600 अतिरिक्त डॉक्टरों की व्यवस्था की जा रही है। भारतीय नौसेना ने विभिन्न अस्पतालों में सहायता के लिए 200 बैटल फील्ड नर्सिंग सहायकों को तैनात किया है। राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) ने महाराष्ट्र, उत्तराखंड और हरियाणा के विभिन्न स्थानों पर 300 कैडेटों और कर्मचारियों को तैनात किया है। घर पर रह रहे रोगियों को परामर्श देने के लिए स्वास्थ्य सेवा से जुड़े वरिष्ठ कर्मियों द्वारा संचालित एक टेली मेडिसिन सेवा जल्द ही शुरू होगी। भारतीय सेना ने विभिन्न राज्यों में नागरिकों के लिए 720 से अधिक बिस्तर उपलब्ध कराए हैं।

रक्षा मंत्री ने सेना को राज्य और जिला स्तरों पर स्थानीय प्रशासन के साथ संपूर्ण विवरण साझा करने का निर्देश दिया।

जनरल बिपिन रावत ने सुझाव दिया कि,

“स्थानीय सैन्य कमांड को नागरिक प्रशासन की सहायता के लिए सक्रिय रूप से जुटना होगा।”

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को यह भी जानकारी दी गई कि डीआरडीओ द्वारा लखनऊ में स्थापित किया जा रहा 500 बिस्तरों वाला अस्पताल अगले 2-3 दिनों में काम करना शुरू कर देगा। एक और अस्पताल वाराणसी में भी स्थापित किया जा रहा है, जिसे 5 मई तक पूरा किया जाना है।

डीआरडीओ के अध्यक्ष ने बताया कि,

“पीएम केयर फंड के तहत निर्मित होने वाले 380 ऑक्सीजन पीएसए (प्रेशर स्विंग एडसॉर्प्शन) संयंत्रों में से पहले चार को अगले सप्ताह तक नई दिल्ली के अस्पतालों में तैनात किया जाएगा।”

रक्षा मंत्री ने सशस्त्र बलों द्वारा विदेशों से और साथ ही देश के भीतर उपभोग और उत्पादन के स्थानों के बीच ऑक्सीजन कंटेनरों के परिवहन में प्रदान की जा रही सहायता की सराहना की। भरे हुए ऑक्सीजन कंटेनरों को भारत लाने के लिए भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के परिवहन विमानों ने सिंगापुर, बैंकाक, दुबई और देश के भीतर से कई उड़ानें भरी और भारतीय नौसेना ने चार जहाजों को – दो को मध्य – पूर्व और दो को दक्षिण – पूर्व एशिया – भेजा।

भारतीय वायु सेना ने 1 मई, 2021 को 830 मीट्रिक टन क्षमता वाले 47 ऑक्सीजन कंटेनरों की ढुलाई करने के लिए विदेशों से 28 उड़ानें भरी। जबकि देश के भीतर, इसने 158 उड़ानें भरकर 2,271 मीट्रिक टन क्षमता वाले 109 कंटेनरों की ढुलाई की। नौसेना और वायु सेना ने अपने भंडारों में से विभिन्न नागरिक अस्पतालों को लगभग 500 पोर्टेबल ऑक्सीजन सिलेंडरों की आपूर्ति भी की है।

रक्षा से जुड़े सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (डीपीएसयू) सीएसआर के तहत अलग – अलग राज्यों के विभिन्न अस्पतालों में आपूर्ति के लिए 40 करोड़ रुपये की लागत से 28 ऑक्सीजन संयंत्र और अन्य चिकित्सा उपकरण खरीद रहे हैं। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने बेंगलुरु में 250 बिस्तरों वाला एक अस्पताल स्थापित किया है। 250 बिस्तरों वाला एक और अस्पताल लखनऊ में स्थापित किया जा रहा है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस बात को दोहराया कि,

“सशस्त्र बलों को नागरिक प्रशासन को सभी आवश्यक सहायता प्रदान करनी चाहिए।” 

उन्होंने रक्षा मंत्रालय एवं तीनों सेवाओं के अधिकारियों से विभिन्न पहलों की प्रगति पर बारीकी से निगरानी रखने को कहा।

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