भारत ने इस कठिन समय में स्वदेशी रूप से निर्मित टीकों की आपूर्ति करके विश्व समुदाय का विश्वास अर्जित किया है- डॉ. हर्षवर्धन

डॉ. हर्षवर्धन ने कोविड -19 से जुड़े मंत्रियों के समूह (जीओएम) की 23वीं बैठक की अध्यक्षता की।

“भारत ने कोविड -19 से संबंधित अपने ग्राफ को सपाट कर दिया है- 146 जिलों में पिछले 7 दिनों से,18 जिलों में 14 दिनों से, 6 जिलों में 21 दिनों से और 21 जिलों में पिछले 28 दिनों से कोई नया मामला सामने नहीं आया है।”

ब्रज पत्रिका। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने एक वीडियो-कॉन्फ्रेंस के जरिए कोविड -19 से जुड़े उच्चस्तरीय मंत्रियों के समूह (जीओएम) की 23वीं बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में उनके साथ विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर, नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप एस. पुरी, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे, गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय, पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय तथा रासायनिक एवं उर्वरक राज्यमंत्री मनसुख मंडाविया भी शामिल हुए।

नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. विनोद के. पॉल आभासी माध्यम से इस बैठक में उपस्थित थे।

बैठक की शुरूआत करते हुए डॉ. हर्षवर्धन ने सभी को यह याद दिलाया कि कोविड के प्रबंधन के लिए गठित मंत्रियों के समूह को काम करते हुए अब एक साल का समय हो चुका है।

डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि,

“पहला मामला पिछले साल 30 जनवरी को दर्ज किया गया था और कोविड के प्रबंधन के लिए गठित मंत्रियों के समूह (जीओएम) की पहली बैठक 3 फरवरी 2020 को हुई थी। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की परिकल्पना के अनुरूप ‘संपूर्ण सरकार’ और ‘संपूर्ण-समाज’ के दृष्टिकोण के साथ, भारत ने सफलतापूर्वक इस महामारी को नियंत्रित किया है। पिछले 24 घंटों में 12,000 से भी कम मामले दर्ज किए गए हैं और सक्रिय मामलों का भार घटकर मात्र 1.73 लाख रह गया है।”

उपलब्धियों का विस्तार से ब्यौरा देते हुए उन्होंने कहा,

“146 जिलों में पिछले 7 दिनों से, 18 जिलों में 14 दिनों से, 6 जिलों में 21 दिनों से और 21 जिलों में पिछले 28 दिनों से कोई नया मामला सामने नहीं आया है। यह उपलब्धि बेहद सक्रियता के साथजांच के जरिए हासिल की गयी है। अब तक 19.5 करोड़ से अधिक जांच की गयी है। जांच की वर्तमान क्षमता 12 लाख प्रतिदिन है।”

उन्होंने आगे कहा कि कुल सक्रिय मामलों में से, मात्र 0.46% वेंटिलेटर पर हैं, 2.20% आईसीयू में हैं और महज 3.02% ऑक्सीजन सहायता पर हैं। डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि यूके वेरिएंट के अब तक 165 मामले सामने आए हैं। उन्हें सुपरवाइज्ड क्वारंटीन और निगरानी में रखा गया है।

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने गर्व के साथ इस बात का उल्लेख किया कि भारत ने ऐसे वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट के दौरान कोविड-19 के टीके की आपूर्ति के माध्यम से अन्य देशों को सहयोग दिया है और टीका देने के तरीकों के बारे में कई देशों के स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित किया है।

डॉ. हर्षवर्धन ने कहा,

“वैश्विक समुदाय का ‘मित्र’ होने के नाते भारत ने इस कठिन समय में स्वदेशी रूप से निर्मित टीकों की आपूर्ति करके वैश्विक समुदाय का विश्वास अर्जित किया है।”

डॉ. सुजीत के. सिंह, निदेशक (एनसीडीसी), ने भारत में कोविड -19 के वर्तमान और भविष्य के परिदृश्य के बारे में एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस रिपोर्ट में  भारत और दुनिया के अन्य देशों में कोविड -19 की पुष्टि वाले मामलों और विकास दर के प्रक्षेप वक्र की तुलना की गई है।

डॉ. सुजीत के. सिंह, निदेशक (एनसीडीसी) ने कहा कि,

“भारत में 7 दिन में 0.90% की विकास दर दर्ज की गयी है, जोकि दुनिया में कोविड की सबसे कम विकास दर है।”

उन्होंने भारत में महामारी के प्रक्षेप वक्र का एक सूक्ष्म विश्लेषण प्रस्तुत किया। इस विश्लेषण में उन्होंने दैनिक आधार पर पुष्टि वाले नये मामलों के विकास दर की प्रतिशतता, ठीक होने की दर (रिकवरी दर), मामलों के पॉजिटिव होने की दर, सक्रिय मामलों के रुझान, खास जिलों में मामलों की सघनता जैसे मापदंडों और घातकता एवं भारत के अलग-अलग राज्यों में नए यूके वैरिएंट के प्रसार जैसे अन्य रुझानों का उल्लेख किया है।

“कारगर नैदानिक ​​प्रबंधन के कारण भारत में मामलों की घातकता के अनुपात में गिरावट का रुझान है और यह जून, 2020 के मध्य में 3.4% से घटकर वर्तमान में 1.4% की दर पर है। उन्होंने यह भी बताया कि दादरा एवं नागर हवेली और दमन एवं दीव में सबसे अधिक 99.79% की रिकवरी दर है, इसके बाद अरुणाचल प्रदेश (99.58%) और ओडिशा (99.07%) का स्थान है, जबकि वर्तमान में सक्रिय मामलों का अधिक भार होने के कारण केरल में 91.61% की रिकवरी दर है।”

उन्होंने यह भी जानकारी दी कि,

“मुंबई, तिरुवनंतपुरम, एर्नाकुलम, कोट्टायम और कोझिकोड वैसे शीर्ष 5 जिले हैं जहां वर्तमान में सबसे अधिक संख्या में सक्रिय मामले दर्ज हैं। महाराष्ट्र और केरल के ऊपर इस समय देश के 70% सक्रिय मामलों का भार है।”

अन्य देशों में इस वायरस के प्रसार की प्रकृति और दुनिया भर में इसके म्यूटेंट स्ट्रेन मिलने को देखते हुए उन्होंने वाले महीनों में सावधानी बरतने की सलाह दी।

नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. विनोद के. पॉल और केन्द्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने एक विस्तृत प्रस्तुति के माध्यम संदेश में टीकों के विकास और 16 जनवरी 2021 को प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किए गए टीकाकरण अभियान की प्रगति के बारे में मंत्रियों के समूह को अवगत कराया।

केन्द्रीय स्वास्थ्य सचिव ने टीकाकरण अभियान से जुड़ी सामग्रियों और अब तक मिले लाभों को दर्शाया; इस अभियान को शुरू करने से पहले 3 दिनों (12 से 14 जनवरी 2021 तक) के भीतर राज्यों / केन्द्र शासित प्रदेशों को 112.4 लाख टीके वितरित किए गए; राज्यों / केन्द्र शासित प्रदेशों के लिए 115.6 लाख अतिरिक्त खुराकें 20 जनवरी 2021 को पूरी हुईं; 69,000 कार्यक्रम प्रबंधक, 2.5 लाख टीका देने वाले कर्मी और टीका देने वाली टीम के 4.4 लाख अन्य सदस्य अब तक प्रशिक्षित किये गये हैं; अब तक 93,76,030 स्वास्थ्य से जुड़ी देखभाल करने वाले कर्मी और 53,94,098 अग्रिम पंक्ति के कर्मी को – विन पोर्टल पर पंजीकृत हैं। उन्होंने राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के साथ समन्वय करके गलत सूचना और अफवाह फैलाने वालों का मुकाबला करने के लिए उपयोग में लायी रही संचार रणनीतियों के बारे में भी जानकारी दी।

डॉ. पॉल ने बताया कि,

“भारत वर्तमान में टीकाकरण कवरेज प्रदान करने में छठे स्थान पर है और जल्द ही अगले कुछ दिनों में तीसरे स्थान पर पहुंच जाएगा। अब तक टीकाकरण किये गये 23 लाख में से सिर्फ 16 एईएफआई हॉस्पिटलाईजेशन के मामले, जो कि कुल का महज 0.0007% ही है, के साथ टीकाकरण के कारण अति गंभीर / गंभीर एईएफआई या मृत्यु का कोई मामला अब तक रिपोर्ट नहीं किया गया है।”

उन्होंने मंत्रियों के समूह को यह भी बताया कि कैसे दुनिया के बाकी हिस्सों की तुलना में भारत के दैनिक नए मामलों का प्रक्षेप वक्र अनुकूल है।

मंत्रियों के समूह (जीओएम) ने भारतीय टीकों को लेकर अन्य देशों से आने वाले अनुरोधों और घरेलू जरूरतों के बीच संतुलन स्थापित करने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।फार्मास्युटिकल्स विभाग की सचिवऔर इन मुद्दों के लिए गठित एनईजीवीएसी के उप-समूह की प्रमुख एस. अपर्णा ने इस संबंध में की गई कार्रवाइयों से मंत्रियों के समूह (जीओएम) को अवगत कराया।

प्रदीप सिंह खारोला, सचिव (नागरिक उड्डयन), डॉ. गुरुप्रसाद महापात्र, सचिव (डीपीआईआईटी), डॉ. बलराम भार्गव, सचिव (स्वास्थ्य अनुसंधान) और महानिदेशक (आईसीएमआर), दम्मू रवि, अतिरिक्त सचिव (एमईए), गोविंद मोहन, अतिरिक्त सचिव (गृह मंत्रालय), नीरजा शेखर, अतिरिक्त सचिव (सूचना एवं प्रसारण), अमित यादव, महानिदेशक, विदेश व्यापार (डीजीएफटी), डॉ. सुनील कुमार, डीजीएचएस और अन्य वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से इस बैठक में भाग लिया।

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