स्वामी विवेकानंद के विचार और उनका प्रभाव आज भी हमारे जीवन में बरकरार है-प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री ने द्वितीय राष्ट्रीय युवा संसद महोत्सव के समापन सत्र को संबोधित किया

प्रधानमंत्री ने युवाओं को राजनीति में निःस्वार्थ और रचनात्मक रूप से योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया

देश के युवा सकारात्मक बदलाव के लिए नवाचार के साथ आगे आ रहे हैं, ये हमारे लोकतंत्र के भविष्य के लिए अच्छे संकेत है-ओम बिड़ला

राष्ट्र के समक्ष आने वाली समस्याओं और चुनौतियों का समाधान लोकतांत्रिक मूल्यों के जरिए निकाला जाएगा- लोक सभा अध्यक्ष

युवाओं के सशक्तीकरण से राष्ट्र का सशक्तीकरण होता है-रमेश पोखकरियाल ‘निशंक’

देश के युवा ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना के वाहक हैं-युवा कार्यक्रम और खेल राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)

ब्रज पत्रिका। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से द्वितीय राष्ट्रीय युवा संसद महोत्सव के समापन सत्र को संबोधित किया। कार्यक्रम का आयोजन संसद भवन के सेंट्रल हॉल में किया गया था। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय स्तर के तीन विजेताओं के विचार भी सुने। इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, केन्द्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, और केन्द्रीय युवा कार्यक्रम और खेल राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) किरेन रीजीजू भी उपस्थित थे।

स्वामी विवेकानंद की जयंती पर उन्हें याद करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस बात पर बल दिया कि,

“लंबा समय बीतने के बावजूद स्वामी विवेकानंद के विचार और प्रभाव आज भी हमारे जीवन में बरकरार हैं। राष्ट्रवाद और राष्ट्र-निर्माण के बारे में उनके विचार और लोगों की सेवा तथा दुनिया की सेवा करने संबंधी उनकी शिक्षा हमें हमेशा प्रेरित करती है।”

प्रधानमंत्री ने व्यक्तियों और संस्थानों के निर्माण में स्वामी जी के योगदान की चर्चा की। जो लोग स्वामी जी के संपर्क में आए, उन्होंने संस्थानों का निर्माण किया, और इन संस्थानों ने बदले में नए संस्थान-निर्माताओं का निर्माण किया। इसने वास्तव में व्यक्ति निर्माण से संस्थान निर्माण और संस्थान निर्माण से व्यक्ति निर्माण के एक पुण्य चक्र की शुरुआत की।

प्रधानमंत्री ने इसे भारत की बहुत बड़ी ताकत बताते हुए व्यक्तिगत उद्यमिता और बड़ी कंपनियों के बीच संबंध का उल्लेख किया। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे हाल ही में लागू हुई राष्ट्रीय शिक्षा नीति की लचीली और नवाचार आधारित शिक्षण पद्धति का लाभ उठाएं। हम देश में एक ऐसा इकोसिस्टम विकसित करने का प्रयास कर रहे हैं, जिसके अभाव में,अक्सर हमारे देश के युवा विदेशों का रुख करते हैं।

प्रधानमंत्री ने बल देते हुए कहा कि,

“ये स्वामी जी ही थे, जिन्होंने उस दौर में कहा था कि निडर, बेबाक, साफ दिल वाले, साहसी और आकांक्षी युवा ही हमारे राष्ट्र की बुनियाद हैं।”

श्री मोदी ने युवाओं को स्वामी विवेकानंद का मंत्र दिया। स्वामी जी कहते थे कि शारीरिक फिटनेस के लिए ‘लोहे के समान मांसपेशियां और वज्र के समान स्‍नायु’, व्यक्तित्व विकास के लिए ‘स्वयं पर भरोसा’ और नेतृत्व एवं टीम भावना के लिए ‘सभी पर भरोसा’ होना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने युवाओं को राजनीति में निःस्वार्थ और रचनात्मक रूप में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करते हुए कहा कि,

“आज ईमानदार लोगों को ये अवसर मिल रहा है कि वे अनैतिक गतिविधियों वाली राजनीति की पुरानी धारणा को बदलें और देश की सेवा करें। आज ईमानदारी और बेहतर प्रदर्शन समय की सबसे बड़ी ज़रूरत बन गए हैं।”

प्रधानमंत्री ने वंशवाद की राजनीति पर अपने विचार रखते हुए तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि, 

“भ्रष्टाचार जिनकी रगों में बसा था, आज उनका भ्रष्टाचार ही उन पर बोझ बन गया है।”

उन्होंने युवाओं से वंशवाद की राजनीति को जड़ से उखाड़ फेंकने का आह्वान किया। राजनीतिक वंशवाद लोकतंत्र में एक नए तरह की अक्षमता और तानाशाही को बढ़ावा देता है। राजनीतिक वंशवाद को बढ़ावा देने वाले लोग केवल परिवार की राजनीति और राजनीति में परिवार को बचाने के लिए काम करते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा, 

“ये बात सही है कि अब केवल सरनेम के सहारे चुनाव जीतने वालों के दिन चले गए हैं, लेकिन राजनीति में वंशवाद का ये रोग अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। राजनीतिक वंशवाद से ग्रसित लोग राष्ट्र प्रथम के बजाय स्वयं और परिवार को बढ़ावा देते हैं। ये सामाजिक स्तर पर मौजूद भ्रष्टाचार का मुख्य कारण है।”

भुज में आए भूकंप के बाद पुनः निर्माण कार्य का उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री ने युवाओं को बताया कि,

“जो समाज संकटों में भी प्रगति के रास्ते बनाना सीख लेता है, वो समाज अपना भविष्य खुद लिखता है। यही वजह है कि 130 करोड़ भारतीय आज अपना भविष्य खुद लिख रहे हैं। आज के युवाओं का हर एक प्रयास, नवाचार और ईमानदार संकल्प हमारे भविष्य की नींव में रखा जा रहा एक मज़बूत पत्थर है।”

इस अवसर पर अपने विचार रखते हुए लोक सभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने कहा कि,

“हमें राष्ट्र उत्थान और संविधान एवं संसद के सशक्तीकरण के लिए युवाओं की ऊर्जा और ताकत का सर्वोत्तम उपयोग करने का संकल्प लेना चाहिए। भारतीय लोकतंत्र का भविष्य निश्चित रूप से काफी उज्ज्वल है, क्योंकि हमारे युवा देश, लोकतंत्र और इसकी व्यवस्था से जुड़े मामलों में काफी सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं। युवा सकारात्मक बदलाव के लिए नवाचार के साथ आगे आ रहे हैं, जो हमारे देश के लोकतांत्रिक भविष्य के लिए अच्छे संकेत हैं।”

श्री बिड़ला ने युवा प्रतिभागियों से आह्वान किया कि वे लोगों के बीच संसदीय कार्यवाही और इसके मूल्यों के बारे में जागरूकता फैलाएं। उन्होंने कहा कि युवाओं को यहाँ से मिलने ताकत और ऊर्जा देश के विभिन्न क्षेत्रों में लोकतंत्र को मज़बूत करने में अहम भूमिका निभाएंगे और राष्ट्र के समक्ष आने वाली समस्याओं और चुनौतियों का समाधान लोकतांत्रिक मूल्यों से निकालने के रास्ते भी खोलेंगे।

श्री बिड़ला ने कहा कि, स्वामी विवेकानंद ने युवाओं को आत्मशक्ति और आत्मविश्वास के गुणों को मज़बूत करने की शिक्षा दी थी। उन्होंने कहा कि वे सभी प्रतिभागियों में वही युवा शक्ति और आत्मविश्वास देख रहे हैं, जो असंभव चीज़ों को भी संभव कर सकते हैं और इनमें स्वामी जी के सपनों को साकार करने की क्षमता है।

संविधान के महत्व के बारे में बताते हुए केन्द्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा कि,

“हमारे संविधान का सबसे प्रमुख अंग उसकी प्रस्तावना और प्रस्तावना की पहली लाइन ‘हम भारत के लोग’ है। यह वाक्य प्रत्येक व्यक्ति को राष्ट्रीयता की भावना में बांधने का काम करता है। संसदीय और संवैधानिक प्रक्रिया में नागरिक सबसे महत्वपूर्ण घटक है और नागरिकों में सबसे महत्वपूर्ण युवा लोग हैं। युवा के सशक्तीकरण से ही राष्ट्र का सशक्तीकरण होता है, और राष्ट्रीय युवा महोत्सव के जरिए समाज के भीतर व्यक्ति के सशक्तीकरण का अभियान और फिर समाज के सशक्तीकरण से राष्ट्र के सशक्तीकरण का अभियान काफी तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।”

स्वामी विवेकानंद को याद करते हुए श्री पोखरियाल ने कहा कि,

“स्वामी जी हमेशा ही युवाओं को देश की सबसे बड़ी ताकत मानते थे। चरित्र निर्माण का जीवन में सबसे ज़्यादा महत्व होता है, और राष्ट्र के साथ-साथ समाज का निर्माण शारीरिक शुद्धता, सामाजिक शुद्धता, बौद्धिक शुद्धता और आध्यात्मिक शुद्धता जैसे चार स्तंभों पर टिका होता है।”

युवा कार्यक्रम और खेल राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) किरेन रीजीजू ने अपने संबोधन में कहा कि,

“यह पहला मौका है, जब राष्ट्रीय युवा महोत्सव का आयोजन तकनीक का उपयोग करते हुए ऑनलाइन-ऑफलाइन दोनों रूपों में हो रहा है। इस बार महोत्सव में सबसे ज्यादा प्रतिभागियों के शामिल होने का रिकॉर्ड भी बना है। इस बार युवा महोत्सव में 24 विविध प्रतियोगिताओं में 7 लाख युवाओं ने भाग लिया।”

उन्होंने राष्ट्रीय युवा संसद महोत्सव के विजेताओं को बधाई दी। किरेन रीजीजू ने कहा कि,

“प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब कोविड-19 के खिलाफ जंग में राष्ट्र से आह्वान किया, उस समय भारत के युवाओं ने इस वैश्विक महामारी के खिलाफ जंग में सबसे आगे आकर अपना योगदान दिया।”

राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर युवाओं को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि,

“भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी युवा ताकत है, जो आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करने में सक्षम है। ये युवा पीढ़ी ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना की वाहक है।”

कार्यक्रम के अंत में गणमान्य लोगों ने राष्ट्रीय युवा संसद 2021 प्रतियोगिता के विजेताओं को स्मृति चिन्ह भेंट किए।

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