ब्रज में हो फ़िल्म सिटी, फ़िल्म उद्योग से जुड़े लोगों की एक स्वर में माँग  

ब्रज पत्रिका, आगरा। राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी की जयन्ती के शुभ अवसर पर ताज़नगरी आगरा के प्रमुख फ़िल्म निर्माता, निर्देशक, लेखक, नाट्यकर्मी, कलाकार, तकनीशियन इंडियन क्लब में एक मंच पर जुटे। आगरा फ़िल्म सिटी संघर्ष समिति के बैनर तले जुटे फ़िल्म इंडस्ट्री के प्रोफेशनल्स ने इस मौके पर एक स्वर से आगरा में फ़िल्म सिटी स्थापना की मांग मुखर की।

फ़िल्म निर्माता रंजीत सामा ने कहा कि,

“आगरा सालों से शूटिंग फ्रेंडली है, और ऐतिहासिक लोकेशन्स का होना चार चांद लगाता है, बाकी कनेक्टिविटी भी चारों तरफ है तो फ़िल्म सिटी का सही स्थान आगरा होना चाहिए था।”

फ़िल्म लेखक और निर्देशक सूरज तिवारी ने कहा कि,

“जहाँ नोएडा में एक फ़िल्म सिटी पहले से ही मौजूद है तो फिर वहाँ दूसरी फिल्म सिटी लाना क्या तर्कसंगत है? जबकि आगरा में पहले से ही 1000 एकड़ ज़मीन पर सरकार का किंगडम कंपनी के संजय खान से करार हो चुका था, तो फिर वो लैंड कहाँ गई, उस पर फ़िल्म सिटी क्यों नहीं बनाई, जिसको एडीए ने भी यूपीएसआईडीसी को सौंपा दिया था। दुर्भाग्य से आगरा को न एयरपोर्ट दिया गया, ना थीम पार्क मिला, ना हाई कोर्ट की बैंच मिली, न इंटरनेशनल स्टेडियम बनवाया गया। कम से कम एक फ़िल्म सिटी तो दे ही देते। आगरा में इस वक़्त संगीत अकादमी, नाट्य अकादमी सरीखे संस्थानों की सख्त जरूरत है।”

फ़िल्म समीक्षक डॉ. महेश धाकड़ ने कहा कि,

“देश में चार जगह तो पहले से ही फ़िल्म सिटी है, लेकिन हमारे आगरा सरीखे ऐतिहासिक विरासत को संजोये हुए शहर में जहाँ कि आगरा घराना शास्त्रीय संगीत की दुनिया में बेहद मशहूर रहा है। सवाल यह है कि कला, साहित्य व सांस्कृतिक धरोहरों के इस शहर आगरा में एक फ़िल्म सिटी क्यों नहीं होनी चाहिए!”

लाइन प्रोड्यूसर एसपी शुक्ल ने कहा कि,

“हमारे पास अगर 10 फिल्में शूट होने के लिए आती हैं, तो लगभग सात से आठ फिल्मों की लोकेशन निर्माता निर्देशक आगरा के आसपास रखना चाहते हैं तो फिर फ़िल्म सिटी नोएडा में क्यों बननी चाहिए?”

लाइन प्रोड्यूसर प्रमोद राणा का कहना है कि,

“जिस भाषा मे हिंदी फिल्में बनती हैं, वो भाषा सिर्फ और सिर्फ आगरा और उसके आस-पास ही बोली जाती है, तो फिर शुद्ध हिंदी भाषी इस बेल्ट में हमारी हिंदी फिल्म सिटी क्यों नहीं बनाई जा रही।”

नाट्यकर्मी अनिल जैन का कहना है कि,

“आगरा में फ़िल्म सिटी होने से लाखों प्रतिभाओं को पंख लग जाएंगे, उन्हें कहीं बाहर काम की तलाश में नहीं जाना पड़ेगा।”

आगरा फ़िल्म सिटी संघर्ष समिति के बैनर तले आयोजित इस परिचर्चा और प्रेसवार्ता में पोस्टर्स पर स्लोगन ये लिखे थे, आगरा को चाहिए फ़िल्म सिटी, आगरा को चाहिए संगीत अकादमी, आगरा को चाहिए नाट्य अकादमी, आगरा को चाहिए फ़िल्म अकादमी, आगरा को चाहिए फ़िल्म म्यूजियम।

प्रेसवार्ता में रंजीत सामा, सूरज तिवारी, डॉ. महेश धाकड़, एसपी शुक्ला, प्रमोद राणा, मुकेश नेचुरल, अनिल जैन, उमा शंकर मिश्रा, एसके जैन, संजय दुबे, चंचल उपाध्याय, पंकज विकल, अमित गर्ग, अर्पित शुक्ला, रवि परिहार, सोमा जैन, श्री आहूजा, अमित तिवारी, चन्द्रकान्त अग्रवाल आदि मौजूद थे। एंकर राहुल उपाध्याय ने इस कार्यक्रम का संचालन किया।

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