‘कोरोना काल’ सिनेमा के लिए बड़ा संकट का दौर, लेकिन नए रूप में दिखेगा अब सिनेमा

ब्रज पत्रिका, आगरा। कोरोना महामारी के फैलने से बॉलीवुड संकट के दौर से गुज़र रहा है। फिल्मों की शूटिंग रद्द हो चुकी हैं। काम के अभाव में ही इस वक़्त फ़िल्म इंडस्ट्री से काफी अच्छी तादाद में जूनियर कलाकार अपने-अपने घरों को लौट चुके हैं। फ़िल्म इंडस्ट्री को सिनेमा हॉल बंद होने से भी बहुत नुकसान उठाना पड़ रहा है।

ताज़ा बनी हुई फिल्मों की रिलीज़ भी नहीं हो सकी है और अभी हाल फ़िलहाल इन सिनेमाहालों के खुलने के भी आसार दिखाई नहीं दे रहे। इन हालातों को इंडस्ट्री से जुड़ी हुई तमाम शख्शियतों ने महसूस करते हुए अपनी-अपनी राय जाहिर की हैं। फ़िल्म ‘आईएम ज़ीरो’ फेम आगरा के फ़िल्म डायरेक्टर सूरज तिवारी करीब एक माह पहले अपने शहर लौटे हैं। फ़िल्म उद्योग के ज्वलंत मुद्दों पर उन्होंने भी ‘ब्रज पत्रिका’ के साथ अब अपनी राय साझा की। प्रस्तुत हैं सूरज तिवारी से हुई खास बातचीत के प्रमुख अंश।

कोरोना महामारी के प्रकोप से धड़ाम गिरी फ़िल्म इंडस्ट्री का बदला स्वरूप क्या होगा?

“शूटिंग में हाथ मिलाना, किस करना, गले मिलना, सिगरेट शेयर करने पर अभी रोक लगाई है। आगे क्या होगा कह नहीं सकते। लेकिन फ़ीचर फिल्मों से ज्यादा अच्छे-खासे बजट वाली वेबसीरीज़ बनेंगी। शार्ट फ़िल्म्स व म्यूजिक वीडियो बनेंगे। फिल्मों को ओटीटी प्लेटफॉर्म से रिलीज़ करने का सिलसिला शुरू हो गया है, ये चलन बढ़ेगा। यू-ट्यूबर फायदे में रहेंगे। लॉक डाउन से एक्सहिबिटर्स को बहुत नुकसान हुआ है। आगे भारी-भरकम खर्च वाले मल्टीप्लेक्स कैसे सर्वाइव करेंगे! अब लोग होम थिएटर को विकल्पों में शामिल करेंगे, बड़े साइज का टीवी, साउंड सिस्टम लगाकर घरों में ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज़ होने वाली बड़े कलाकारों की फिल्मों का आनंद लेंगे। एक खास तरह के मिनी थिएटर का चलन शुरू होगा। जैसा कि ‘के-सेरा-सेरा’ ने ‘छोटू महाराज’ कॉन्सेप्ट पेश किया था, इस कॉन्सेप्ट में 40 से 50 लोगों की ही सिटिंग का इंतज़ाम होता है, स्क्रीनिंग के साथ डिनर भी होता है। इस तरह की स्क्रीनिंग में प्रॉब्लम नहीं है, ये प्राइवेट स्क्रीनिंग में आती है।”

फ़िल्म इंडस्ट्री के विकेंद्रीकरण की संभावनाएं जताई जाने लगी हैं। क्या क्षेत्रीय सिनेमा विस्तार लेगा?

फिल्म उद्योग का विकेंद्रीकरण होगा। अब मौके हरेक प्रदेश में पैदा होंगे। महाराष्ट्र में शूटिंग में कलाकारों व तकनीशियनों की एसोसिएशनों की दखलंदाजी से त्रस्त निर्माता-निर्देशक अब महाराष्ट्र से बाहर शूटिंग डेस्टिनेशन तलाश कर वहीं शूटिंग करना पसंद कर रहे हैं, कई बड़ी फिल्में उत्तर भारत के ऐतिहासिक पृष्ठभूमि वाले शहरों में फिल्माई जा चुकी हैं। आने वाले वक्त में ये ही बढ़ेगा। संसाधनों से सम्पन्न फ़िल्म स्टूडियो में शूटिंग जरूर पहले से ज्यादा होंगी, रामोजी पूरे साल बुक बताया जा रहा है। यूपी में सब्सिडी के कारण शूटिंग बहुत होने लगी हैं नोएडा फ़िल्म सिटी में काम बढ़ सकता है। मैंने भी उत्तरप्रदेश के लिए मुख्यमंत्री को एक बेहतर प्रस्ताव दिया है।

फ़िल्म इंडस्ट्री में कोरोना काल बाद क्या बदलाव आ सकते हैं, नपोटिज़्म की बात चल रही है, इस पर लगाम लग सकेगी?

जी नहीं बिल्कुल नहीं, बल्कि असुरक्षित वातावरण के चलते नपोटिज़्म और बढ़ेगा क्योंकि फिल्मों से जुड़े परिवार खुद के परिवारीजनों की आर्थिक सुरक्षा के प्रति और सजग होंगे। बाकी कलाकारों के प्रति उतने संवेदनशील नहीं दिखेंगे। काम घटेगा तो, उन्हीं बाहरी कलाकारों के काम पर कैंची चलेगी।

कोरोना काल के बॉलीवुड पर अभी और साइड इफेक्ट्स क्या हो सकते हैं?

बेशक़ कोरोना महामारी शो बिज़निस को तबाह कर रही है, इससे सेलेब्रिटीज़ को बहुत नुकसान होगा। सभी लोगों को इंडस्ट्री में काम नहीं मिलेगा। पब्लिक प्रोग्राम नहीं होंगे इसलिए शो बिज़निस के लिए और मुश्किल समय आने वाला है। इससे उन कलाकारों को सबसे ज्यादा नुकसान होगा जो सेलेब्रिटी स्टेटस पाने के बाद सिर्फ शोज से इंडस्ट्री में सर्वाइव कर रहे थे, उनका गुजारा अब कैसे चलेगा ये सोचनीय है।

कोरोना महामारी के चलते फ़िल्म इंडस्ट्री को मानव संसाधन की कितनी क्षति हुई है?

कोरोना महामारी के कारण ज्यादातर बाहर के श्रमजीवी कलाकार वापस लौट गए हैं एक कटु अनुभव लेकर, वो अब वापस शायद ही लौटेंगे क्योंकि वो अब अपने प्रदेश में ही काम की तलाश करेंगे। मानव संसाधनों का संकट फ़िल्म इंडस्ट्री को झेलना पड़ेगा। मुम्बई में ज्यादातर बाहर के ही लोग तो थे।

हालिया घटनाओं का भी क्या असर इंडस्ट्री पर पड़ेगा, ख़ासकर सुशांत सिंह राजपूत आत्महत्या मामले का?

सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के कारण जो भी रहे हों मगर इसके दूरगामी परिणाम आएंगे। माता-पिता अपने बच्चों को लेकर ज्यादा सजग हुए हैं, इनमें कुछेक ने तो बच्चों को फिल्मी दुनिया से वापस बुलाना शुरू कर दिया। अनिश्चितता और अवसाद की स्थितियों से बच्चों को बचाने के लिए ऐसा किया जा रहा है क्योंकि हाल-फिलहाल फिल्मों में काम नहीं।

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