ग्रामीण भारत जब तक विकसित नहीं होगा, तब तक विकसित राष्ट्र की कल्पना करना मुश्किल है-नरेन्द्र सिंह तोमर

किसानों को कानूनी बंधनों से मुक्त करने और उन्हें सशक्त बनाने के लिए सरकार ने हाल ही में कानूनी संशोधन किए हैं-नरेंद्र सिंह तोमर

केंद्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर गुरूवार को भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा ग्रामीण अर्थव्यवस्था : आर्थिक पुनरुद्धार और सतत-समान विकास की कुंजी विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में बोल रहे थे।

ब्रज पत्रिका। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण, ग्रामीण विकास, पंचायती राज और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा है कि देश की 70 फीसदी आबादी के ग्रामीण क्षेत्र में निवास करने के बावजूद पूर्ववर्ती सरकारों का ध्यान इस क्षेत्र पर अपेक्षाकृत कम रहा, इस कारण से ग्रामीण अर्थ व्यवस्था में एक असंतुलन उत्पन्न हो गया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में शुरू से ही कृषि और ग्रामीण अर्थ व्यवस्था पर पूरा ध्यान केंद्रित किया गया है। विगत साढ़े छह वर्षों में गांवों के विकास और वहां मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए क्रांतिकारी कदम उठाए गए हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे हैं।

केंद्रीय मंत्री श्री तोमर गुरूवार को भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा ग्रामीण अर्थव्यवस्था : आर्थिक पुनरुद्धार और सतत-समान विकास की कुंजी विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में बोल रहे थे।

केंद्रीय मंत्री श्री तोमर ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि,

“ग्रामीण भारत जब तक विकसित नहीं होगा, तब तक विकसित राष्ट्र की कल्पना करना मुश्किल है। प्रधानमंत्री जी के न्यू इंडिया के विजन में कई आयाम हैं। इसमें राष्ट्र को समग्र रूप से आगे बढ़ाने पर बल दिया गया है, और इसके केंद्र में ग्रामीण एवं कृषि आधारित अर्थ व्यवस्था को ही रखा गया है।”

श्री तोमर ने बताया कि,

“13 वें वित्त आयोग में पांच वर्ष के लिए देश की पंचायतों को विकास के लिए 65 हजार करोड़ रुपए आवंटित किए गए थे। किंतु 2015 में 14 वें वित्त आयोग की रिपोर्ट में पंचायतों को 2 लाख 292 करोड़ रुपए देने की अनुंशसा की गई और विगत पांच वर्षों में हमारी सरकार ने इसमें से 96 प्रतिशत राशि पंचायतों को सीधे पहुंचाने का कार्य किया है। इस राशि से गांवों में मौलिक सुविधाओं में विस्तार हुआ है।”

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री तोमर ने कहा कि,

“6 साल पहले जहां ग्रामीण क्षेत्र में लागों के पास शौचालय, बिजली, रसोई गैस जैसी सुविधाओं का तो अभाव था ही, 3 करोड़ परिवार ऐसे थे जिनके पास अपना स्वयं का मकान भी नहीं था। आज घर-घर में ये सुविधाएं हैं, प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना से निर्मित घरों के साथ तो ये मूलभूत सुविधाएं प्रारंभ से ही उपलबध कराई जा रही है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से देश में अब तक 1 लाख 78 हजार बसाहटों को मुख्यधारा से जोड़ा गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने अपने दूसरे कार्यकाल में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क के तीसरे चरण को मंजूरी दी है, इसके तहत 1 लाख 25 हजार किमी सड़क बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें से 30 हज़ार किमी से ज्यादा लम्बाई की सड़कें राज्यों को स्वीकृत की जा चुकी है। इस वर्ष ग्रामीण विकास मंत्रालय 2 लाख करोड़ रुपए गांवों के विकास एवं ग्रामीणों के कल्याण पर खर्च करने जा रहा है। कोविड के संकट को देखते हुए मनरेगा के बजट में 50 हजार करोड़ रुपए की वृद्धि की गई है। मनरेगा में इस वर्ष अब तक 1 लाख 11 हजार 500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया जा चुका है, इसमें से 76 हजार करोड़ रुपए राज्यों को जारी भी किए जा चुके हैं।”

श्री तोमर ने इस अवसर पर दीनदयाल अंत्योदय योजना- राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना के कार्यों की भी जानकारी दी।

केंद्रीय मंत्री श्री तोमर ने कहा कि,

“किसानों को कानूनी बंधनों से मुक्त करने और उन्हें सशक्त बनाने के लिए सरकार ने हाल ही में कानूनी संशोधन किए हैं। देश में दस हजार नए कृषक उत्पादक संगठनों का गठन किया जा रहा है, ताकि छोटे व मझौले किसान भी उन्नत एवं क्लस्टर आधारित कृषि कर ज्यादा आय अर्जित कर सकें। एक लाख करोड़ रुपए का कृषि अवसंरचना कोष सरकार ने स्थापित किया है, ताकि निजी निवेश कृषि अधोसंचना के क्षेत्र में गांवों तक पहुंचे और इस क्षेत्र में बने हुए असंतुलन को दूर किया जा सके।”

श्री तोमर ने कहा कि जब गांव में पैसा पहुंचता है, ग्रामीणों की आय में वृद्धि होती है और उनकी क्रय शक्ति बढ़ती है तो इससे ग्रामीण अर्थ व्यवस्था को गति मिलना सुनिश्चित है।

श्री तोमर ने सीआईआई के प्रतिनिधियों से आह्वान किया कि वे इस विषय पर विचार करें कि किस तरह से खाद्य प्रसंस्करण की इकाइयों को ज्यादा से ज्यादा गांवों तक पहुंचाया जा सकता है । उन्होंने कहा कि देश में 7 करोड़ बहनें 63 लाख से अधिक स्व सहायता समूहों के माध्यम से आजीविका मिशन से जुड़ कर उत्पाद बना रहीं हैं। उनके उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में भी प्रयास किया जाना चाहिए।

इस अवसर पर बंधन बैंक के संस्थापक एवं सीआईआई की ग्रामीण अर्थ व्यवस्था परिषद के अध्यक्ष सीएस घोष, केपीएमजी-इंडिया के प्रमुख नीलाचल मिश्रा, सुधीर देवरस ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

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