देश के महान खिलाड़ी सौरव गाँगुली, नए क्रिकेटरों के लिए प्रेरणास्रोत

ब्रज पत्रिका, आगरा। बीसीसीआई के अध्यक्ष और मशहूर क्रिकेट स्टार सौरव गांगुली से मुलाकात आज भी याद है। जो कि आगरा में अपने अज़ीज मित्र प्रवीन तालान के सूर्यनगर स्थित दफ़्तर में हुई थी, जहाँ कि एकदम तसल्ली से साक्षात्कार लेने का मुझे सुअवसर मिला। उस वक़्त सौरव एक कार्यक्रम में पधारे थे। भारतीय टीम के बेहतरीन कप्तान के अलावा बाएं हाथ के मध्यक्रम और ओपनर बल्लेबाज रहे सौरव को सन 2004 में पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया। लोग प्यार से ‘दादा’ यानि बड़े भाई और ‘महाराजा’ उपनाम से भी पुकारते हैं। आप अब तक के सबसे सफल भारतीय टेस्ट कप्तानों में से एक हैं, जिन्होंने 49 टेस्ट मैचों में से 21 में जीत दिलाई, 11 जीत संग विदेशों में सबसे सफल भारतीय टेस्ट कप्तान हैं। सौरव के कप्तान बनने से पहले भारतीय टीम आईसीसी रैंकिंग में आठवें स्थान पर थी, उनके कार्यकाल में दूसरे स्थान पर पहुंच गयी। सौरव ने 311 एक दिवसीय मैचों में 11,363 रन बनाये, 113 टेस्ट मैचों में 7212 रन बनाये। एक दिवसीय मैच में सर्वाधिक रन बनाने वाले खिलाडियों में 5वें स्थान पर और 10,000 रन बनाने वाले 5वें खिलाडी हैं, साथ ही सचिन तेंदुलकर के बाद दूसरे भारतीय खिलाडी हैं। इसके अलावा नए खिलाड़ियों को भी सौरव ने अपनी कप्तानी के वक़्त खेलने के मौके दिए।
सौरव का जन्म 8 जुलाई 1972 को कोलकाता में चंडीदास और निरूपा गांगुली के सभ्रांत परिवार में हुआ। पिता चंडीदास छपाई व्यवसाय चलाते थे और कोलकाता के सबसे रईस व्यक्तियों में शुमार थे। चूँकि कोलकाता के लोगों का पसंदीदा खेल फुटबॉल है लिहाज़ा आप भी शुरू में इसकी तरफ आकर्षित हुए। क्रिकेट की दुनिया में आगे बढ़ने में बड़े भाई स्नेहाशीष ने काफी मदद की। करियर की शुरुआत स्कूल और राज्य स्तरीय टीम में खेलते हुई। रणजी ट्राफी, दलीप ट्राफी आदि में अच्छे प्रदर्शन बाद राष्ट्रीय टीम में इंग्लैंड के खिलाफ खेलने का मौका मिला। पहले टेस्ट में 131 रन बनाकर टीम में जगह बनाई। श्रीलंका, पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अच्छा प्रदर्शन और कई मैन ऑफ द मैच ख़िताब जीतने के बाद टीम में जगह सुनिश्चित हुई। 1999 क्रिकेट विश्व कप में राहुल द्रविड़ के साथ 318 रन की साझेदारी की जो कि विश्वकप इतिहास में सर्वाधिक है।
सन 2000 में टीम खराब स्वास्थ्य के चलते तत्कालीन कप्तान सचिन तेंदुलकर ने कप्तानी त्यागी, जिसके फलस्वरूप सौरव कप्तान बनाए गए। 2003 में क्रिकेट विश्व कप में भारत का नेतृत्व किया, फाइनल मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया से हार गए। व्यक्तिगत प्रदर्शन में कमी के कारण, अगले वर्ष टीम से बाहर होना पड़ा। 2006 में राष्ट्रीय टीम में वापसी हुई और बेहतर प्रदर्शन किया। कोच ग्रेग चैपल के साथ विवाद के चलते पुनः टीम की सदस्यता से हाथ धो बैठे। लेकिन 2007 क्रिकेट विश्व कप के लिए पुनः चयन हुआ। वर्ष 2008 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू सीरीज बाद क्रिकेट से संन्यास ले लिया।

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